शिखरिणी छंद – भारत वंदन

शिखरिणी छंद – भारत वंदन बड़ा ही प्यारा है, जगत भर में भारत मुझे।सदा शोभा गाऊँ, पर हृदय की प्यास न बुझे।।तुम्हारे गीतों को, मधुर सुर में गा मन भरूँ।नवा…
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स्रग्धरा छंद – शिव स्तुति

स्रग्धरा छंद – शिव स्तुति शम्भो कैलाशवासी, सकल दुखित की, पूर्ण आशा करें वे।भूतों के नाथ न्यारे, भव-भय-दुख को, शीघ्र सारा हरें वे।।बाघों की चर्म धारें, कर महँ डमरू, कंठ…
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हरिणी छंद – राधेकृष्णा नाम-रस

हरिणी छंद – राधेकृष्णा नाम-रस मन नित भजो, राधेकृष्णा, यही बस सार है।इन रस भरे, नामों का तो, महत्त्व अपार है।।चिर युगल ये, जोड़ी न्यारी, त्रिलोक लुभावनी।भगत जन के, प्राणों…
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अनुष्टुप छंद – गुरु पंचश्लोकी

अनुष्टुप छंद – गुरु पंचश्लोकी| सद्गुरु-महिमा न्यारी, जग का भेद खोल दे।वाणी है इतनी प्यारी, कानों में रस घोल दे।। गुरु से प्राप्त की शिक्षा, संशय दूर भागते।पाये जो गुरु…
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