गीतिका – अभी तो सूरज उगा है

गीतिका – अभी तो सूरज उगा है. प्रधान मंत्री मोदी जी की कविता की पंक्ति से प्रेरणा पा लिखी गीतिका। अभी तो सूरज उगा है,सवेरा यह कुछ नया है। प्रखरतर…
View Post

शालिनी छन्द – राम स्तवन

शालिनी छन्द by Ram Stavan हाथों में वे, घोर कोदण्ड धारे।लंका जा के, दैत्य दुर्दांत मारे।।सीता माता, मान के साथ लाये।ऐसे न्यारे, रामचन्द्रा सुहाये।। मर्यादा के, आप हैं नाथ स्वामी।शोभा…
View Post

स्रग्धरा छंद – शिव स्तुति

स्रग्धरा छंद – शिव स्तुति शम्भो कैलाशवासी, सकल दुखित की, पूर्ण आशा करें वे।भूतों के नाथ न्यारे, भव-भय-दुख को, शीघ्र सारा हरें वे।।बाघों की चर्म धारें, कर महँ डमरू, कंठ…
View Post

हरिणी छंद – राधेकृष्णा नाम-रस

हरिणी छंद – राधेकृष्णा नाम-रस मन नित भजो, राधेकृष्णा, यही बस सार है।इन रस भरे, नामों का तो, महत्त्व अपार है।।चिर युगल ये, जोड़ी न्यारी, त्रिलोक लुभावनी।भगत जन के, प्राणों…
View Post

अनुष्टुप छंद – गुरु पंचश्लोकी

अनुष्टुप छंद – गुरु पंचश्लोकी| सद्गुरु-महिमा न्यारी, जग का भेद खोल दे।वाणी है इतनी प्यारी, कानों में रस घोल दे।। गुरु से प्राप्त की शिक्षा, संशय दूर भागते।पाये जो गुरु…
View Post