शिखरिणी छंद – भारत वंदन

शिखरिणी छंद – भारत वंदन

बड़ा ही प्यारा है, जगत भर में भारत मुझे।
सदा शोभा गाऊँ, पर हृदय की प्यास न बुझे।।
तुम्हारे गीतों को, मधुर सुर में गा मन भरूँ।
नवा माथा मेरा, चरण-रज माथे पर धरूँ।।

यहाँ गंगा गर्जे, हिमगिरि उठा मस्तक रखे।
अयोध्या काशी सी, वरद धरणी का रस चखे।।
यहाँ के जैसे हैं, सरित झरने कानन कहाँ।
बिताएँ सारे ही, सुखमय सदा जीवन यहाँ।।

दया की वीणा के, मुखरित हुये हैं स्वर जहाँ।
सभी विद्याओं में, अति पटु रहे हैं नर जहाँ।।
उसी की रक्षा में, तन मन लगा तत्पर रहूँ।
जरा भी बाधा हो, अगर इसमें तो हँस सहूँ।।

खुशी के दीपों की, जगमग यहाँ लौ नित जगे।
हमें प्राणों से भी, अधिक प्रिय ये भारत लगे।।
प्रतिज्ञा ये धारूँ, दुखित जन के मैं दुख हरूँ।
इन्हीं भावों को ले, ‘नमन’ तुम को अर्पित करूँ।।

शिखरिणी (लक्षण छंद)

रखें छै वर्णों पे, यति “यमनसाभालग” रचें।
चतुष् पादा छंदा, सब ‘शिखरिणी’ का रस चखें।।

“यमनसाभालग” = यगण, मगण, नगण, सगण, भगण लघु गुरु ( कुल 17 वर्ण)

122 222, 111 112 211 12

(शिव महिम्न श्लोक इसी छंद में है।)

Leave a Reply
You May Also Like

भूल गये मितवा

भूल गये मीतवा, तुम्हें याद नही कल,जो बिताये थे , साथ मैं हमने पल,छोड़ गये यू, अंधेरी रात मै हमको,बची रोशनी भी छीन ले गये तुम,भूल गये पल वो, याद…
View Post

गीतिका – अभी तो सूरज उगा है

गीतिका – अभी तो सूरज उगा है. प्रधान मंत्री मोदी जी की कविता की पंक्ति से प्रेरणा पा लिखी गीतिका। अभी तो सूरज उगा है,सवेरा यह कुछ नया है। प्रखरतर…
View Post

स्रग्धरा छंद – शिव स्तुति

स्रग्धरा छंद – शिव स्तुति शम्भो कैलाशवासी, सकल दुखित की, पूर्ण आशा करें वे।भूतों के नाथ न्यारे, भव-भय-दुख को, शीघ्र सारा हरें वे।।बाघों की चर्म धारें, कर महँ डमरू, कंठ…
View Post

शालिनी छन्द – राम स्तवन

शालिनी छन्द by Ram Stavan हाथों में वे, घोर कोदण्ड धारे।लंका जा के, दैत्य दुर्दांत मारे।।सीता माता, मान के साथ लाये।ऐसे न्यारे, रामचन्द्रा सुहाये।। मर्यादा के, आप हैं नाथ स्वामी।शोभा…
View Post

Kavya by Subhash Singh

Table of Contents Hide जनतादौलत का करिश्माअकड़रोशनीऔर पढ़े जनता नेता और जनता की ये कैसी आंखमिचोली है की नेता कितने घाग जनता कितनी भोली है दोनों ही इस बात को…
View Post